
कल्पना करो कि पूरा ब्रह्मांड (सभी तारे, गैलेक्सी, ग्रह, तुम, मैं — सब कुछ) शुरू में एक बहुत छोटे, गर्म और घने बिंदु (जैसे एक परमाणु से भी छोटा) में समाया हुआ था।
फिर लगभग 13.8 अरब साल पहले उस बिंदु में इतना दबाव और गर्मी हो गई कि वो फट गया (या कह लो, बहुत तेजी से फैलने लगा)।
इस फटने को ही हम Big Bang कहते हैं।
लेकिन ध्यान देना — ये कोई बम जैसा “धमाका” नहीं था जो खाली जगह में फटा। खाली जगह भी नहीं थी उस समय। Big Bang के साथ ही समय, जगह (space), पदार्थ और ऊर्जा सब बनना शुरू हो गया।
क्या हुआ उसके बाद? (स्टेप बाय स्टेप आसान तरीके से)
- पहले पल — ब्रह्मांड बेहद छोटा, बेहद गर्म (ट्रिलियन डिग्री) और घना था।
- कुछ सेकंड बाद — ये तेजी से फैलने लगा। जैसे गुब्बारा फूलता है, वैसे ही ब्रह्मांड फैल रहा है (लेकिन अंदर से, न कि बाहर किसी चीज में)।
- ठंडा होने लगा — जैसे फैलता गया, वैसे ठंडा होता गया। छोटे-छोटे कण बने (क्वार्क, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन)।
- कुछ मिनट बाद — हाइड्रोजन और हीलियम जैसे हल्के तत्व बने।
- लाखों साल बाद — गैस के बादल बने, जिनसे तारे और गैलेक्सी बनीं।
- अरबों साल बाद — हमारे सूरज, पृथ्वी जैसे ग्रह बने।
आज भी ब्रह्मांड फैल रहा है। गैलेक्सी एक-दूसरे से दूर जा रही हैं, जैसे गुब्बारे पर बिंदे एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं जब गुब्बारा फूलता है।
क्यों मानते हैं वैज्ञानिक इसे?
- हम देखते हैं कि दूर की गैलेक्सी हमसे दूर जा रही हैं (हबल ने देखा था)।
- पूरे ब्रह्मांड में एक हल्की “गुनगुनाहट” (Cosmic Microwave Background) है, जो Big Bang के बाद बची हुई गर्मी का सबूत है।
- हाइड्रोजन और हीलियम की मात्रा भी ठीक वैसी ही है जैसी Big Bang की गणना बताती है।
एक मजेदार उदाहरण:
सोचो तुम फिल्म को रिवाइंड कर रहे हो। सब कुछ पास आता जा रहा है, छोटा होता जा रहा है। अगर तुम बहुत पीछे जाओ (13.8 अरब साल), तो सब कुछ एक बिंदु में सिमट जाता है। वो बिंदु फटने वाला पल ही Big Bang है।
समझ आ गया ना?
प्रश्न: बिग बैंग सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति लगभग 13.8 अरब वर्ष पूर्व एक अत्यंत सघन एवं ऊष्म बिंदु (Singularity) से हुई। इस बिंदु में समस्त पदार्थ एवं ऊर्जा संकेंद्रित थे।
तत्पश्चात ब्रह्मांड का तीव्र विस्तार प्रारंभ हुआ, जिसे बिग बैंग कहा जाता है। विस्तार के साथ तापमान में कमी आई और हाइड्रोजन तथा हीलियम जैसे हल्के तत्वों का निर्माण हुआ। आगे चलकर इनसे तारे, आकाशगंगाएँ तथा ग्रहों का निर्माण हुआ। वर्तमान में भी ब्रह्मांड का विस्तार जारी है।
इस सिद्धांत के समर्थन में एडविन हबल द्वारा प्रतिपादित रेड शिफ्ट, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड विकिरण तथा तत्वों के अनुपात जैसे वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं।
अतः बिग बैंग सिद्धांत ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सर्वाधिक स्वीकार्य वैज्ञानिक मॉडल माना जाता है।